Showing posts with label Indian Sex Stories. Show all posts
Showing posts with label Indian Sex Stories. Show all posts

निशा की बहन लताशा की चुदाई

निशा की बहन लताशा की चुदाई

प्रेषक : रवि

मेरी पिछली कहानी "शादी शुदा औरत की चुदाई" को आप सभी ने पसंद किया उसके लिए धन्यवाद। अब मैं आपको एक और कहानी बताने जा रहा हूँ, इस बार मैंने निशा और निशा की बहन लताशा के साथ सेक्स किया।

निशा के साथ सेक्स करने के बाद वो मुझे अकसर अपने घर बुलाया करती थी।

एक दिन की बात है कि उसने मुझे अपने घर बुलाया और हम सम्भोग कर ही चुके थे कि उसकी बड़ी बहन लताशा आ गई। निशा ने मुझे उससे मिलवाया। जैसे ही मैंने लताशा को देखा तो बस देखता रह गया। पूरी भरी हुई और एकदम सुगठित बदन। उसकी बड़ी बड़ी गाण्ड देखकर तो मैं दंग रह गया, लम्बी स्कर्ट में एकदम मस्त लग रही थी। मेरा मन तो किया कि अभी इसकी गांड चाट जाओ पर मैंने अपने ऊपर नियंत्रण रखा और उनके साथ चाय पीकर चला गया।

अगले दिन मैंने निशा को फ़ोन किया और थोड़ी बहुत बात करने के बाद मैंने बोल दिया- मुझे तुम्हारी बहन लताशा के साथ सेक्स करना है।

पहले तो निशा थोड़ा नाराज़ हुई, पर मैंने मना लिया, निशा बोली- अगली बार जब तुम आओगे तो मैं लताशा को बुला लूंगी।

उस दिन से मैं लताशा की गांड के सपने लेता रहा।

अगले सप्ताह निशा ने अपने घर खाने पर मुझे और लताशा को बुलाया। जैसे ही मैं निशा के घर गया, लताशा और निशा आपस में बातें कर रही थी और एसा लगा रहा था कि जैसे मेरा ही इंतज़ार कर रही थी। लताशा ने गुलाबी रंग की लम्बी स्कर्ट पहनी थी। बातों बातों में पता लगा कि लताशा के पति भी ज्यादातर बिज़नस टूर पर रहते हैं और लताशा के मुकाबले काफी मोटे हैं तो मैं अंदर ही अंदर सोचने लगा कि इसका मतलब लताशा को भी सेक्स के तलब तो रहती होगी।

खैर हमने कुछ बातें की और उसके बाद हम तीनों ने ड्रिंक लिया और हल्का म्यूजिक चला दिया। थोड़ा सा सरूर होने के बाद मैंने म्यूजिक थोड़ा तेज़ कर दिया और निशा को डांस करने के लिए बोला। हम डांस करने लगे, बीच-बीच में ड्रिंक भी लेते रहे।

फिर निशा बोली- तुम लताशा के साथ डांस करो, मैं कुछ बनाकर लाती हूँ।

मैंने कहा- ठीक है।

लताशा भी थोड़ा नशे में आ गई थी। पहले तो हम सामान्य डांस कर रहे थे, फिर मैंने हिम्मत दिखा कर लताशा को कमर से पकड़ कर डांस करना शुरू किया। लताशा का जिस्म भरा था, कमर में हाथ डालते ही मेरा तो मन किया कि गांड को दबा दूँ लताशा की।

डांस के साथ साथ मैंने लताशा को एक और ड्रिंक दिया, इस बार ड्रिंक थोड़ा ज्यादा था। इतने में निशा भी आ गई और फिर हम तीनों डांस करने लगे। कभी मैं निशा को गले लगा लेता तो कभी निशा लताशा को, तो कभी लताशा को मैं।

निशा तो जानती थी कि आज मुझे लताशा के साथ सेक्स करना है इसलिए लताशा को सेक्स के लिए तैयार भी करना था। निशा डांस करते करते लताशा और मुझे चूम लेती थी। धीरे धीरे मैंने भी निशा और डांस डांस में लताशा को चूमा जिसका लताशा ने कोई भी विरोध नहीं किया जिससे मेरी हिम्मत बढ़ गई।निशा बोली- तुम लोग डांस करो, मैं खाना लगा देती हूँ।

मैं लताशा के साथ डांस करता करता, उसको चूमता रहा। मुझे लगा कि लताशा गर्म हो रही थी और मेरा लंड भी खड़ा हो रहा था, जिसका एहसास लताशा को हो रहा था। डांस करते करते कभी मैं उसको उल्टा करके बाहों में ले लेता जिस कारण लताशा की गांड में मेरा लंड छू जाता। निशा मुझे किचन से देख रही थी। उसने मुझे इशारा किया कि तुम शुरू करो।

मैंने हिम्मत करके लताशा का चेहरा अपनी तरफ किया और उसके होटों पर होंट रख दिए। लताशा ने भी मेरा पूरा साथ दिया। लताशा के होंट चूसते चूसते मैंने उसकी गांड पर हाथ फेरना शुरू कर दिया जिसका उसने कोई एतराज़ नहीं किया। डांस करते करते मैं लताशा को सोफे पर ले गया और उसको लिटा कर खुद उसके ऊपर लेट गया और चूमता रहा। चूमते-चूमते मैं एक हाथ लताशा की जांघ पर फेरने लगा और उसकी स्कर्ट ऊपर करने लगा।

अब लताशा भी गर्म हो चुकी थी, वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैं खड़ा हुआ और अपनी टी-शर्ट उतार दी और अपनी पैंट भी और दोबारा उसके ऊपर लेट गया।

लताशा ने स्कर्ट ऊपर कर ली थी और दोनों टांगें खोल ली और मैं उसके ऊपर लेट गया। मेरा लंड उसकी चूत पर लग रहा था। फिर मैंने लताशा की स्कर्ट उतार दी।

जैसे ही लताशा की लम्बी स्कर्ट उतारी, लताशा का गोरा बदन मेरे सामने था और लताशा ने गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। सेक्स बम्ब लग रही थी वो। उसके बड़े बड़े मम्मे देख कर में दंग रह गया और ब्रा के ऊपर से ही चूसने लगा। ज्यादा देर न करते हुए मैंने लताशा की ब्रा और पैंटी उतार दी, अपने आपको भी नंगा कर दिया और दोबारा लताशा के ऊपर लेट कर उसे चूमने लगा और उसकी चूत पर लंड रगड़ने लगा। धीरे धीरे उसके मम्मों को चूसते हुए मैं उसकी चूत तक आ गया। लताशा की चूत एक दम गुलाबी थी, ऐसा लगा रहा था कि जैसे में किसी भारतीय नहीं बल्कि किसी विदेशन की चुदाई करने जा रहा हूँ।

मैं लताशा की चूत चाटने लगा। लताशा के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। फिर मैंने लताशा को उल्टा कर दिया और उसकी कमर पर चूमते हुए उसकी गांड पर काट दिया, जिसके कारण वो थोड़ा चिल्लाई। आवाज़ सुनकर निशा भी रसोई से आ गई, वो तो हमको वहीं से देख कर कपड़े उतार चुकी थी। निशा मेरे पास आकर खड़ी हो गई। अब मैं लताशा की चूत चाट रहा था और निशा की चूत में ऊँगली कर रहा था।

पूरे घर में सिसकारियाँ सी गूँज रही थी जो मुझे और उतेजित कर रही थी। मैंने लताशा को घोड़ी बना दिया और उसकी गांड चाटने लगा। लताशा की गांड का छेद निशा की गांड से बड़ा और गुलाबी था। जिसको देख कर मैं पागलों की तरह चाटने लगा। फिर मैंने निशा को भी लिटा दिया और उसकी चूत और गाण्ड चाटने लगा। थोड़ी देर चाटने के बाद मैंने लताशा को घोड़ी बनाया और उसकी चूत के छेद पर लण्ड रख कर पेल दिया। जिसके कारण मुझे और लताशा को दोनों को हल्का दर्द हुआ। उसके बाद में लताशा की चुदाई करने लगा और ऊँगली उसकी गांड में डालने लगा।

निशा लताशा के मम्में चूस रही थी। जैसे ही मेरा झड़ने को हुआ, मैं लण्ड बाहर निकाल कर चूत चाटने लगा लताशा की। फिर लताशा के मुँह में मैंने अपना लंड डाल दिया और चुसाने लगा। थोड़ी देर चुसाने की बाद मैंने निशा और लताशा को घोड़ी बना दिया और लताशा की गांड में लंड डाल दिया और तेज़ तेज़ चुदाई करने लगा। कभी लताशा की गांड में डालता तो कभी निशा की। मेरे सामने एक ब्लू फिल्म का सीन घूम रहा था, ठीक वैसे ही कर रहा था। दोनों की गांड मारने में और देखने में बड़ा मजा आ रहा था।

थोड़ी देर चुदाई करने के बाद जब मैं झड़ने लगा तो मैंने दोनों को सीधा कर दिया और दोनों के मम्में आपस में जोड़ दिए और दोनों के मम्मों पर वीर्य गिरा दिया। फिर दोनों ने मेरे वीर्य को अपने मम्मों पर रगड़ा और फिर खड़ी हो गई। मैंने लताशा को गले लगाकर चूमा।

फिर निशा बोली- चलो, अब खाना खा लो।

तीनों ने नंगे ही एक साथ खाना खाया और उसके बाद मैंने रात वहीं गुजारी। रात में दो बार और लताशा के साथ सेक्स किया निशा थोड़ी जल्दी सो गई थी। उस दिन से आज तक कभी निशा और कभी लताशा के साथ सेक्स करता हूँ। अब तो लताशा अपने घर भी बुला लेती है कभी-कभी।
You have read this article Hindi Sex Stories / Indian Sex Stories with the title Indian Sex Stories. You can bookmark this page URL http://jadejurgensen.blogspot.com/2011/06/blog-post.html. Thanks!

दिल करता है कि बस

दिल करता है कि बस

दोस्तो, मेरा नाम समीर है। आज मैं आपको मेरे और मेरी गर्लफ्रेंड के कुछ सच्चे और गर्मागर्म संस्मरण बताने जा रहा हूँ।

कॉलेज में मेरी गर्लफ्रेंड बनी सोफिया। लड़की क्या थी बस ऐसा लगता था कि चुदाई के लिए ही बनो हो। गोल-गोल पुष्ट 38 इन्च के मम्मे, सुडौल भरे-भरे नितम्ब, जिन्हें देख कर दिल करता था कि अभी अपना लंड निकाल के रगड़ दो। हमारा प्यार होंठ चूसने से शुरू होकर मम्मे दबाने और जांघें सहलाने तक पहुँच चुका था मगर कोई जगह न मिलने के कारण हमें इतने में ही गुज़ारा करना पड़ता था। कभी कभी तो हम दोनों इतने गर्म हो जाते थे कि दिल करता था कि कार ही में कर डालूं। वो भी बहुत चुदासी हो जाती थी और "सी-सी" कर के मेरे लंड को रगड़ने लगती थी।

एक दिन मेरे घर में कोई नहीं था, तो मैंने सोचा कि क्यों न उसे अपने घर बुलाने का रिस्क उठाया जाये। सच में अब रहा नहीं जा रहा था। चूत तो उसकी भी गर्म थी तो उसने हामी भर दी। हम अपने दिमाग से नहीं अपनी टांगों के बीच से सोच रहे थे।

माँ के जाते ही मैंने फटाफट खाने पीने का सामान खरीदा, फिर से ब्रश किया, कंडोम्स तो थे ही जिन्हें मैं मुठ मारने के लिए रखता था। बहुत इंतज़ार के बाद वो आई। क्या लग रही थी ! उसने कपड़े ऐसे पहने थे कि उसका अंग-अंग पूरा उभर के दिख रहा था। मैंने उसे चूमा और अन्दर ले आया। दिल तो कर रहा था कि बस शुरू हो जाऊं मगर फोर्मलिटी भी तो निभानी थी. हमने कोल्ड-ड्रिंक पी और इधर उधर की बातें की। वो अपने घर में सहेलियों के साथ पिक्चर जाने का बहाना बना कर आई थी। मेरी माँ को डिनर के बाद ही आना था और अभी सिर्फ बारह ही बजे थे। अभी काफी समय था। उसने अपना दुपट्टा हटा कर एक तरफ़ रख दिया और उसके वो गदराये हुए उभार मेरी आँखों के सामने आ गए। अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके पास सोफे पर जाकर बैठ गया। पहले मैंने उसके गाल पर चूमा जो कि बाहर गर्मी की वजह से अभी तक लाल थे, यह किस पता नहीं कब एक गहन चुम्बन में बदल गया। हमारी ज़बानें आपस में लड़ने लगीं और हम बेतहाशा एक दूसरे के होंठ चूसने लगे। फिर मैं उसकी गर्दन की तरफ आया और उसे चूमने लगा। उसके छाती तक आते आते मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था।

उसकी सांसें बहुत तेज़ चल रही थीं। मैंने नीचे से उसकी कमीज़ के अन्दर हाथ डाला और उसकी चिकनी कमर से होता हुआ उसके ब्रा में कसे मम्मों पर पहुँच गया। दूसरा हाथ भी मैंने उसकी कमीज़ में डाला और उसकी पीठ सहलाने लगा। हमारी सांसें और तेज़ हो गई थीं।

"सोफिया...!"

"सी...हाँ"

"अपने कपड़े उतारो न..."

यह सुन कर उसने अपने दोनों हाथ ऊपर कर लिए। मैंने इशारा समझ कर फ़ौरन उसकी कमीज़ से हाथ निकले और उसे उतार दिया। मेरे सामने उसके बड़े-बड़े सख्त मम्मे थे। मैंने उसे अपनी ओर खींचा और उन्हें सहलाना और दबाना शुरू किया। मेरा लौड़ा उसकी जांघों से छू रहा था। मैंने पीछे से उसकी ब्रा के हुक खोल दिए।

"बड़े एक्सपर्ट हो इसे खोलने में !"

"जिस्म की प्यास सब सिखा देती है, जानेमन !" यह कह कर मैंने उसकी ब्रा उतार दी।

उफ़! ऐसे हसीन गदराये, रसीले स्तन तो मैंने ब्लू फिल्मों में ही देखे थे। मेरे हाथों मानो खज़ाना लग गया हो। मैंने पहले उन्हें सहलाया और झुक कर उसके गुलाबी, खड़े हुए चुचूक को मुँह में ले लिया।

'अआह !" उसके मुँह से निकला।

एक हाथ से मैं दूसरे स्तन को मसलने लगा। उसने एक हाथ बढ़ा कर मेरे लंड पर रख दिया। मैं पहले तीन-चार बार कार में उससे मुठ मरवा चुका था और उसे उंगली से चोद भी चुका था। उसने मेरे एलास्टिक वाले पजामे में हाथ डाल कर मेरा अकड़ा हुआ, गरमाया लंड पकड़ लिया। उसकी नर्म और गर्म हथेली में जाकर वो और उछलने लगा। मैं एक एक करके उसके मम्मे चूस रहा था। उन्हें छोड़ कर मैं उसे अपनी तरफ खींच के उसकी उभरी, भरी हुई गांड दबाने लगा। मैंने आगे से उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया और शलवार नीचे गिरी पर पूरी नहीं। अब मैंने एक हाथ पीछे से उसकी चड्डी में डाल दिया और एक हाथ से चड्डी के ऊपर से उसकी चूत मसलने लगा। वो ऐसे करहने लगी जैसे कि उसे दर्द हो रहा हो। वो मेरे लंड को और जोर से हिलाने लगी। मैं उसकी गांड जोर जोर से भींच रहा था और फिर अपने नंगा लंड उसके हाथ से छुड़ा कर आगे से उसकी गीली चड्डी पर रगड़ने लगा। उसको थोड़ा सा आगे झुका कर मैंने अपनी बीच की ऊँगली पीछे से उसकी चूत पे रख दी। बिल्कुल गीली और गर्म थी साली।

" सी...आआआ.... सब कुछ यहीं पर करोगे क्या?"

मैं जानबूझ कर चाह रहा था कि एक बार मैं झड़ जाऊं क्योंकि फिर चुदाई देर तक कर सकता हूँ। इतनी उत्तेज़ना में अगर उसकी चूत में डालता तो फ़ौरन झड़ जाता।

"क्यों? बहुत खुजली हो रही है?" मैंने छेड़ते हुए पूछा।

"मत पूछो... ! दिल करता है कि बस..."

"बस क्या?"

जवाब में उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और अपनी चूत की तरफ खींचने लगी। मैंने आगे से उसकी चड्डी हटाई और अपना मोटा, गरम सुपारा उसकी चूत के मुँह पर रख दिया और रगड़ने लगा। इससे उसकी भग्नासा भी रगड़ खाने लगी। मैंने एक झटके में अपनी टी-शर्ट उतारी और उसकी गांड पकड़ के अपनी ओर खींचा और ऊपर से लंड रगड़ के गीली चूत पर घिसने लगा। उसके नंगे मम्मे मेरी नंगी छाती से दब रहे थे। मेरा लंड उसकी चड्डी में था। मेरे पूर्व-स्राव और उसकी चूत के रस ने चड्डी को आगे से बिलकुल भिगो दिया था। मेरे लंड पर उसकी चड्डी का दबाव भी पड़ रहा था। मैंने उसको धीरे-धीरे पीछे धक्का देते हुए दीवार के सहारे लगा दिया। उसे दीवार ठंडी तो ज़रूर लगी होगी मगर वो वासना में इतनी खोई थी कि उसने परवाह नहीं की। मैंने उसे दीवार के सहारे लगा कर उसकी गांड पकड़ के उसी चूत रगड़ाई शुरू कर दी।

"हाँ और जोर से...कितने दिन से प्यासी हूँ मैं तेरा गरम लंड यहाँ लगवाने को !"

"ले मेरी जान... इसके बाद अन्दर डाल के खुजली भी दूर करूँगा।"

हम दोनों इतने गरम हो चुके थी कि जैसे ही हमने अपनी ज़बानें एक दूसरे से लगाई, मेरे लंड ने ज़ोरदार पिचकारी छोड़ दी। ढेर सारा गरमागर्म, गाढ़े पानी ने उसकी चूत और चड्डी पूरी तरह भिगो दी। मेरे पानी की गर्मी से उसकी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया। मज़े के कारण हम दोनों की आँखें बंद हो गईं और हम दोनों पता नहीं कितनी देर तक ऐसे ही खड़े रहे।
You have read this article Hindi Sex Stories / Indian Sex Stories with the title Indian Sex Stories. You can bookmark this page URL http://jadejurgensen.blogspot.com/2011/06/blog-post_24.html. Thanks!

काश मैं उसका पति होता

काश मैं उसका पति होता !

प्रेषक : मयंक पोद्दार

मैंने अभी अभी अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ना शुरू किया है और उसी से ख्याल आया कि मैं आप सब को अपनी सच्ची आप-बीती बताऊँ।

जिस औरत की मैं बात कर रहा हूँ वो मेरी पड़ोसन शिल्पा है। दरअसल मेरी और मेरे सामने वाले घर में रहने वाले लड़के की शादी करीब करीब एक साथ ही हुई थी। मेरी बीवी और वो दोनों नई दुल्हन थी तो दोनों सहेलियाँ बन गई। वो लड़की गज़ब की चीज़ है। मेरी बीवी भी कम खूबसूरत नहीं है मगर उस लड़की की फिगर और आँखें बहुत नशीली हैं। वो काफी आधुनिक घर की है इसलिए हमेशा जींस और टॉप वगैरह पहनती है जिसमें उसकी फिगर शादी के बाद भी बड़ी मादक लगती है। उसको देखते ही मैं अपनी बीवी को भूल जाता हूँ और मन करता है उसको रगड़ दूं !

काफी समय से यह इच्छा थी, मगर मौका ही नहीं मिल रहा था।

एक बार मेरी बीवी अपने मायके गई थी और मेरे माँ-बाप भी शहर से बाहर गए थे। मैं रात की नौकरी करता हूँ इसलिए सुबह घर पर आता हूँ। जिस वक्त मैं घर आ रहा था उस वक्त शिल्पा अपने पति से बाय-बाय कर रही थी क्योंकि वो अपनी दुकान जा रहा था। मुझे देख के उसने प्यारी सी मुस्कराहट दी और मैंने भी वापस मुस्कुरा दिया और उसके पति से हाथ मिलाया। फिर वो अपनी गाड़ी में दुकान चला गया और मैं भी अपने फ्लैट की तरफ मुड़ा।

तभी पीछे से आवाज़ आई- भैया !

मैंने पीछे घूम के देखा तो शिल्पा मुझे पुकार रही थी। मैंने कहा- हाँ भाभी ?

उसने कहा- मेरे कंप्यूटर में कुछ खराबी आ गई है और मैंने एक जरूरी इमेल करनी है। क्या मैं आपका लैपटॉप प्रयोग कर सकती हूँ?

मैंने कहा- हाँ हाँ ! क्यों नहीं !

और वो मेरे पीछे पीछे मेरे घर चली आई।मेरा लैपटॉप मेरे बेडरूम में था तो हम सीधा बेडरूम में चले आये। मेरी पत्नी घर पर नहीं थी इसलिए कमरा थोड़ा फैला हुआ था। शराब को बोतल ऐसे ही पड़ी थी और मेरे लैपटॉप पर कुछ अश्लील वेब साइट्स खुली हुई थी।

मैंने कहा- भाभी, आप बैठिये, मैं लैपटॉप देता हूँ !

मैंने ऐसे ही लैपटॉप पकड़ा दिया। जैसे ही उन्होंने लैपटॉप देखा तो शिल्पा का चेहरा लाल हो गया, उसने झिझकते हुए कहा- भैया, आप ही वेब साईट खोल कर दीजिये।

मैंने लैपटॉप लिया तो देखा कि नंगी वेब साइट्स खुली हुई थी। मैं घबरा गया और बोला- सॉरी भाभी, यह लीजिये ! अब सब ठीक है !

शिल्पा बोली- भाभी नहीं है तो खूब ऐश हो रही है?

मैंने कहा- मन तो बहुत करता है मगर कुछ भी नहीं कर पाता, सिर्फ इन्टरनेट का ही सहारा है !

उसने कहा- क्या आप मुझे इन वेब साइट्स के लिंक लिख कर दे सकते हैं?

मैं हैरान रह गया ! मैंने कहा- क्या भाभी ?

वो बोली- हाँ ! वो असल में मनीष को दिखानी हैं, शायद ये देख कर वो थोड़ा रोमांटिक हो जायें !

मैंने पूछा- क्यों ? क्या वो अभी रोमांटिक नहीं है?

तो शिल्पा बोली- रोमांटिक का र भी नहीं आता उनको ! बाद रात को आएगा दुकान से, दो पेग पिएगा और मेरे हाथों में अपने छोटे से लंड को देकर कहेगा- हिला दो !

मैं उसे झरवा देती हूँ और फिर वो सो जाता है। मेरे अरमान और बदन की गर्मी वहीं की वहीं रह जाती है। मैंने कई बार कोशिश की, मगर वो समझता ही नहीं ! कहता है कि बहुत थक गया हूँ।

शादी से लेकर आज तक बस आठ या दस बार ही हमने सेक्स किया है जिसमें वो पूरा अन्दर तक भी नहीं जा सका।

वो बोली- भैया, ये मेरी बहुत व्यक्तिगत बातें हैं, किसी को नहीं बताना !

मैंने कहा- आप चिंता मत करो !

मैं समझ गया था कि लोहा गर्म है, हथौड़ा मारने की देर है।

फिर वो बोली- मेरा काम हो गया है, मैं चलती हूँ।

पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैंने कहा- बस एक चीज दिखानी है आपको !

और कह के अपनी जींस नीचे कर दी। मेरा आठ इंच का लंड खड़ा हुआ फुफकार रहा था। वो पलटी और उसकी आँखें फटी की फटी रह गई, पसीना उसके गाल से बहने लगा और चेहरा लाल हो गया। वो मेरे पास आई, मेरी आँखों में गुस्से से देखा और मुझे जोरदार थप्पड़ मार दिया। मैं बहुत घबरा गया, शायद मैंने उसकी बातों से गलत समझ लिया था कि वो मेरे साथ अपनी प्यास बुझा लेगी। मुझे लगा कि अब मेरी बदनामी कर देगी ये !

मगर वो बोली- दो साल से मैं आपके घर आ रही हूँ, मगर आज पहली बार बेडरूम तक आई हूँ फिर भी तुमने इतनी देर लगा दी इस चीज़ को दिखाने में ??

मेरी सांस में सांस आई और जान में जान, गिरता हुआ लंड फिर से तन गया और शिल्पा को मैंने बिना कुछ और सोचे समझे अपनी बाहों में भर लिया। मेरे बदन की जैसे बरसों की प्यास बुझ रही थी। मैंने अपना लंड उसके हाथ में दिया, अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और जोर जोर से चूसने लगा। मेरा हाथ उसके टॉप में घुसे और उसकी ब्रा का हुक ढूंढने लगे। मैंने बिना देर किये हुक खोला और पपीते जैसे दो मम्मे मेरे हाथों में आ गए।

उसकी साँसें गरम हो गई, मैं बता नहीं सकता कि उसके जिस्म से आग निकल रही थी, वो पागलों की तरह मेरे लंड से खेल रही थी और मुझे चुम्मे दे रही थी। एकदम जवान नई दुल्हन की तरह तड़प रही थी। मैंने उसका टॉप और ब्रा उतार कर फेंक दी और अपनी टी-शर्ट और बनियान भी उतार दिया। मैंने उसको दीवार के साथ खड़ा किया और अपनी छाती से उसके मम्मे दबा दिए, उसके माथे से लेकर छाती तक हज़ारों चुम्मियाँ ली और कई जगह तो लाल निशान भी बना दिए।

वो भी भूखी शेरनी की तरह मेरे बदन से खेल रही थी और मेरे होंठों को, गालों को, और छाती को चाट रही थी। उसके मुँह से बस आऽऽह…ऽऽ आऽऽऽऽ ऊऽऽऽ … म्म्मऽऽऽ आऽऽऽ लव यू जान, मेरे असली मर्द....म्म्मम्म्म्मम्म......आआआअ.......यही आवाजें निकल रही थी।

मैंने पंद्रह मिनट तक उसके दोनों मम्मे चूसे और वो तब पागल सी हो है थी। मेरे लंड को रबड़ का खिलौना समझ कर खेल रही थी और अपनी चूत पर पायज़ामे के ऊपर से ही रगड़ रही थी। लेकिन मैं भी कम नहीं था, मैंने और भड़काया, उसके हाथों से लंड खींच लिया और उसका सर नीचे की ओर दबाकर इशारा किया कि मुँह में ले !

वो तो जैसे तैयार थी, पूरा लंड मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी, जैसे रेगिस्तान की गर्मी में किसी को पानी मिल जाए !

बीस मिनट बाद मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटाया। मैंने अपनी जीभ से उसकी नाभि चाटी और और उसकी पैंटी को दांतों में लेकर नीचे किया।

वो बोली- क्या बात है आपमें ! कमाल की कला है बिस्तर में औरत के साथ खेलने की ! मैं कबसे इस सपने के साथ जी रही थी, जो आज पूरा होने जा रहा है।

मैंने कहा- मैं भी इसी सपने को आज तक देख रहा था !

अब वो पूरी नंगी थी, चूत बिल्कुल साफ़ और पूरी गीली ! मैंने उसकी टांगें थोड़ा फैलाई और चूत का पानी चाट कर साफ़ किया। वो छटपटाई और मेरे बालों को जोर से खींचा। मैंने उसकी चूत को खोला तो वो पूरी लाल थी, मैंने अपनी जीभ से चाटना शुरू किया और उसका चिल्लाना और तड़पना !

मैं कैसे बताऊँ कि जितनी देर तक चाटा, वो पानी छोड़ती रही जैसे की महीनों से उसने पानी न झारा हो।

तवा पूरा गर्म था, मैंने फटाफट कंडोम निकाला और लंड पर चढ़ा कर उसकी गांड के नीचे तकिया रखा और दोनों हाथों से उसके हाथ पकड़ कर लण्ड चूत पर रख दिया उसकी ! मुझे पता था कि वो बहुत चिल्लाएगी इसलिए अपने होठों से उसके होंठ बंद कर दिए और एक झटके में थोड़ा सा घुस गया। उसकी चूत वाकई काफी कसी हुई थी, लगभग अनचुदी !

अभी लंड आधा ही गया था कि वो दर्द से कराह उठी, अन्दर ही अन्दर चिल्ला रही थी और पैरों को जोर जोर से पटकने लगी। मैंने एक मिनट बाद दोबारा धक्का मारा और पूरा लंड अन्दर घुसा दिया। उसने मेरा मुँह अपने मुँह से हटाया और जोर से चिल्लाई- यह क्या किया ? मैं मर गई, उई माँ ! मैं मर गई ! निकालो इसे.............

मैंने बिना कुछ सुने धक्के मारने शुरू किये, धीरे धीरे उसे मज़ा आने लगा और वो मेरी कमर में नाखून मारने लगी। मैंने भी उसे खूब चाटा, करीब पंद्रह मिनट तक उसे चोदने के बाद मैंने अपनी पूरी पिचकारी अन्दर छोड़ दी। तब तक वो 1-2 बार झड़ चुकी थी। वो मेरे शरीर को कस के पकड़े हुए थी और चाट रही थी।

मैं थक कर उसके मम्मों पर गिर गया और वो मेरे बालों में प्यार से हाथ फेरने लगी। दो मिनट के बाद मैं उठा और अपना लंड उसकी चूत से निकाला, उसने बड़े प्यार से मेरा कंडोम उतारा और उसके अन्दर का सारा वीर्य अपने मम्मों पर उड़ेल कर मल लिया।

वो बोली- यह मेरा प्रसाद है जो मैं अपने जिस्म पे लगा रही हूँ !

मैंने प्यार से उसे खूब सारे और चुम्मे दिए। उसकी चूत से थोड़ा सा खून छलक आया था जो मैंने रुमाल से साफ़ कर दिया। वो बहुत खुश थी, इस चुदाई के बाद जैसे उसका मन और बदन का हर अंग खिल उठ था। वो इतनी खुश थी कि उसकी आँखों से आंसू छलकने लगे और वो मुझसे काफ़ी देर तक चिपकी रही जैसे मन ही मन वो चाह रही हो कि काश मैं उसका पति होता !

मेरी भी तमन्ना पूरी हो गई थी। वो मेरे बाथरूम में और कपडे पहन कर चली गई।

"ये पल मैं कभी नहीं भूल सकती"......बस यही बोली और मेरे लंड को चूम कर चली गई।

अग्ले दिन वो मुझे मार्केट में मिली और बोली- क्या मेरी याद नहीं आई?

मैंने कहा- क्या कह रही हो, याद तो हर पल आती है !

वो बोली- मैं कल अपने मायके जा रही हूँ !

और वहाँ का फ़ोन नंबर देकर बोली- शाम को फ़ोन करना !

दोबारा उसको पाने का मौका मिल रहा था। वो मुलाकात कैसी रही, अगली बार लिखूंगा।
You have read this article Hindi Sex Stories / Indian Sex Stories with the title Indian Sex Stories. You can bookmark this page URL http://jadejurgensen.blogspot.com/2011/06/blog-post_4769.html. Thanks!

मेरी तो बहुत छोटी है

मेरी तो बहुत छोटी है

प्रेषक :

मेरा नाम अंकित जैन है। मैं 21 वर्षीय हट्टा कट्टा नौजवान हूँ, इंदौर में रहता हूँ। मेरा अभी इंजीनियरिंग में एड्मिशन हुआ है। मेरा लौड़ा 9 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा और काला है। मुझे चोदने की काफी इच्छा थी पर पूरी नहीं होती थी। इसलिए दिन में कभी कभार मैं मूठ मार लिया करता था।

एक दिन मेरे पड़ोस में किरायेदार रहने आये। उनके 3 बच्चे थे- पिंकू, रानी और नेहा।

नेहा सभी से बड़ी थी उसकी उम्र 18 साल की थी। वो 12वीं में थी, उसकी बोर्ड की परीक्षा थी। नेहा काफी सुन्दर थी। उसके अभी बूबे छोटे छोटे थे और जवानी में कदम ही रखा था। मैं उस पर मरता था। उसकी मम्मी और मेरी मम्मी की अच्छी पटने लगी।

एक दिन उसकी मम्मी ने मुझे कहा- बेटा, नेहा को गणित के कुछ सवाल हल करा देना।

मैंने तुरंत हाँ कर दी। मैंने उसकी याद में बाथरूम में जाकर एक बार मुठ मारी। फिर वो मेरे कमरे में आई तो थोड़ी शरमा रही थी। मैंने उसे सवाल समझा दिए, वो चली गई।

उस रात मुझे नींद नहीं आई, मैंने फिर मुठ मारी और सो गया।

सुबह मैं उठा और बालकनी पर घूमने लगा। वो भी छत पर कपड़े सूखने के लिए डालने आई। मैं उसे देख रहा था।

उसने बोला- भैया, मुझे आज कुछ सवाल और हल करा देना !

मैंने उसे बोला- एक शर्त पर कि तुम मुझे कभी भैया नहीं कहोगी।

वो हंस दी और कहा- तो मैं तुम्हें क्या कहूँ ?

मैंने कहा- तुम मुझे अंकित कहा करो।

वो बोली- आप कितने बड़े हो, मैं आपका नाम कैसे ले सकती हूँ !

मैंने कहा- मुझे कोई दिक्कत नहीं है, तुम बोल सकती हो !

हाँ करके वो चली गई।

वो दोपहर को खाना खाकर मेरे घर मेरे कमरे में आई। मेरे घर में पापा कुछ काम से बाहर गए थे, मम्मी सो रही थी और मेरा छोटा भाई स्कूल गया था। मैंने सोचा कि आज मौका अच्छा है !

मैंने पहले से ही अपने कमरे में सेक्सी कहानियों वाली किताब बिस्तर पर खुली छोड़ दी। वो आई और उसने देखा।

मैं किसी बहाने से कमरे से बाहर चला गया। थोड़ी देर बाद आया तो नेहा किताब पढ़ रही थी। मैं आया तो वो देख कर डर गई, बोली- यह कैसी किताब है? आप ऐसी किताब पढ़ते हो?

मैंने कहा- तुमने कभी पढ़ी है ?

उसने कहा- नहीं !

मैंने कहा- तुम इसे पढ़ो, इसमें कितना मज़ा आता है, फिर कहना कि यह कैसी लगती है। तुम भी इसे पढ़ने के लिए मरोगी।

वो बोली- इसमें सभी गन्दी बातें हैं।

मैंने कहा- नहीं ये सारी बातें प्यार की हैं, तुमने कभी प्यार किया ?

वो बोली- छीः मैं नहीं करती किसी से !

मैंने कहा- तुम इस किताब को पढ़ो, तुम्हें अभी प्यार हो जायेगा।

उसने कहा- ऐसा नहीं हो सकता।

मैंने कहा- तुम खुद देख लो।

वो पढ़ने लगी, वो गरम हो रही थी, मैं उसे घूर रहा था।

थोड़ी देर बाद मैंने कहा- तुम्हें एक चीज दिखाऊँ?

वो बोली- क्या ?

मैंने कहा- तुम किसी को बताओगी नहीं तो दिखाऊंगा ! वो बोली- ठीक है।

मैंने उसे अपना लण्ड खोल कर दिखा दिया और कहा- कभी देखा है ऐसा लौड़ा ?

वो बोली- छीः, यह गन्दी चीज है ! इसे अन्दर करो नहीं तो मैं कभी तुमसे बात नहीं करुँगी।

मैंने कहा- अरे, यह गन्दी नहीं है, शादी के बाद यही तो लड़की के अंदर जाता है।

वो बोली- कैसे?

मैंने कहा- तुम्हें सभी कुछ समझाना पड़ेगा और तुम चाहती हो तो मैं समझा देता हूँ।

वो बोली- किसी ने देख लिया तो ?

मैंने कहा- नहीं, कोई नहीं देखेगा।

उसने हाँ बोल दिया।

मैंने कहा- इसे हाथ में लो !

उसने हाथ में लिया और धीरे धीरे हाथ फेरने लगी। मैं काफी उत्तेजित हो गया था और मैंने धीरे से उसके वक्ष पर हाथ फेरे और चूची पर दबा दी। वो भी गरम होने लगी। मैंने धीरे से उसकी चूत पर हाथ रख दिया।

वो बोली- यह क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- तुम्हें बता रहा हूँ कि यह लड़की के अन्दर कैसे जाता है।

वो बोली- इतना लम्बा लौड़ा कहाँ जायेगा?

मैंने कहा- तुम जहा से सु-सु करती हो, यह वहीं जायेगा।

वो डर गई, वो बोली- मेरी तो बहुत छोटी है, उसमे ऊँगली नहीं जाती, ये लौड़ा कहाँ से जायेगा।

मैंने कहा- जायेगा, तुम रुको, मैं डालूँगा।

वो बोली- कोई देख लेगा तो?

मैंने कहा- कोई नहीं देखेगा।

फिर उसकी सलवार का नाड़ा खोला और मैंने उसकी चूत में ऊँगली डाल दी।

वो बोली- दर्द हो रहा है !

मैं उसके दूध दबाने लगा और उसे काफी गर्म कर दिया, उसकी चूत चाटने लगा वो सिसकी लेने लगी और बोली- मुझे कुछ कुछ हो रहा है !

मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी।

फिर वो बोली- और करो !

मैंने धीरे से अपनी ऊँगली उसमें डाल दी फिर उसे कहा- तुम मेरे लौड़े को मुँह में लो !

वो बोली- नहीं, यह गन्दा है, मैं नहीं करुँगी !

मैंने कहा- नहीं, तुम्हें मजा आयेगा।

मेरी जिद के आगे उसने मुँह में ले लिया फिर मैं गर्म हो गया और उसे भी कर दिया।

मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया और अपना लण्ड उसकी चूत पर रख कर दबाब बनाया, वो बोली- नहीं ! दर्द हो रहा है ! मैं मर जाउंगी !

मैंने कहा- नहीं, पहली बार में तो होता है, फिर तुम्हें मजा आएगा !

वो भी अब चुदने के लिए तैयार थी।

मैंने अपना पूरा दबाब दल कर उसके अन्दर लण्ड डाला तो आधा ही अन्दर गया और वो रोने लगी। मैंने उसे होंठों पर चूमा और थोड़ी जगह बना कर ऊपर-नीचे होने लगा।

उसे मजा आने लगा। फिर मैंने उसकी चूत में पूरा लण्ड डाल दिया। वो जोर से रोने लगी। मैंने भी उसे जोर से होंठों पर किस किया। उसे भी मजा आने लगा। फिर मैंने काफी देर तक सेक्स किया। वो भी झड़ गई और मैं भी झड़ गया।

हम दोनों अलग हो गए।

मैंने पूछा- अब पता चला कि अन्दर कैसे जाता है?

वो मुस्कुराई और मेरे होटों पर किस करके अपने घर चली गई।
You have read this article Hindi Sex Stories / Indian Sex Stories with the title Indian Sex Stories. You can bookmark this page URL http://jadejurgensen.blogspot.com/2011/06/blog-post_5439.html. Thanks!

हसीना की चूत में पसीना

हसीना की चूत में पसीना

प्रेषक : बोब सिंह

मेरा नाम आर्यन है, मैं मोरादाबाद में रहता हूँ। मेरी कहानी एक सच्ची कहानी है। मेरी कहानी सुनकर लड़कों को मुठ ज़रूर मारना पड़ेगा और लड़कियों को अपनी चूत में ऊँगली करे बगैर चैन नहीं मिल पायेगा।

मैं इंजीनियरिंग का छात्र हूँ और मैं कमरा लेकर रह रहा हूँ। मेरे साथ मेरा दोस्त भी रहता है, हम दोनों एक साथ पढ़ते हैं। हम दोनों की गर्लफ्रेंड भी हैं, मेरी गर्लफ्रेंड का नाम श्वेता है और मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड का नाम हनी है।

एक दिन हम हनी के घर गए थे। वहाँ उसकी मामी की लड़की निकली वो अपनी जवानी की देहलीज़ को पार कर रही थी, उसकी उम्र करीब 18 वर्ष की होगी। उसकी चूचियों को देखकर तो हम दोनों के होश उड़ गए और हम दोनों का लंड सांप के फन की तरह फनफना के खड़ा हो गया। उसी दिन जब हम लौट रहे थे तो हमने उसे चोदने की योजना बनाई और योजना के मुताबिक जब उसके घर में कोई नहीं था, तब हम गए और घण्टी बजाई, वो बाहर निकली।

हमने अनजान बनकर पूछा- हनी है ?

तो उसने कहा- नहीं है !

हमने कहा- अन्दर आकर थोड़ा इन्तज़ार कर लेते हैं।

तो उसने कहा- ठीक है, आओ !

जब हम अन्दर गए तो उसने कहा- मैं चाय लेकर आती हूँ !

जब वो चाय लेने जा रही थी तो उसके चूतड़ों की चाल को देखकर मेरे दोस्त का लंड खड़ा हो गया और वो सोफे पड़ी उसकी ब्रा को लेकर उसके कमरे में मुठ मारने चला गया जहाँ पहले से ब्लू फिल्म की सीडी लगी हुई थी। तो वो उसको देखने में मस्त हो गया और मैं आगे जाकर बैठ गया। वो आई तो मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका एक चुम्बन ले लिया तो वो हंसकर बोली- तुम बहुत शैतान हो !मैं समझ गया कि रास्ता साफ़ है। तो मैंने कहा- यार, तुम तो बड़ी सेक्सी हो ! आज से पहले कभी चुदवाया है?

तो उसने कहा- नहीं, कभी तुम्हारे जैसा चोदू मिला ही नहीं !

मैंने उसकी एक चूची को कसकर पकड़ लिया, उसकी सिसकी निकल गई।

मैंने कहा- आज तुमको तो चोदकर रहूँगा !

उसने कहा- कोई आ जायेगा !

मैंने कहा- तब की तब देखेंगे !

और मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी, उसकी चूचियों को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया।

उसने कहा- मैं तुम्हारे लंड के दर्शन करना चाहती हूँ !

मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरे लंड को देखकर वो बोली- मेरी चूत में पसीना आ रहा है ! अब मुझे चोदो !

तो मैंने कहा- इतनी भी क्या जल्दी है, अभी तो सिर्फ पसीना ही निकला है ! बाद में तो रसमलाई भी निकलेगी, जिसको खाए बगैर मै तुमको नहीं चोदूंगा।

इतना कहकर मैं उसकी दोनों चूचियों को पकड़कर कस के मसलने लगा।

तब उसके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी- अह्ह्ह्हह्ह्हह्ह्ह्झ अओउच प्लीस बस करो ! मै मर जाउंगी !

फिर मैं उसकी जींस के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। फिर वो अपने आप ही अपनी जींस उतारने लगी। मै उसकी चिकनी और कुंवारी चूत को देखकर बोला- क्या मस्त चूत है ! देख मैं कैसे इसे रौंदता हूँ!

उसने कहा- प्लीज़ जल्दी डालो ! मुझसे रहा नहीं जा रहा है !

मैंने कहा- पहले मेरे लंड को मुँह में लेकर इसे मजा दो !

उसने मेरा लंड अपने मुँह में लिया तो कहा- यह तो बहुत गरम है !

और वो अन्दर-बाहर करने लगी।

मैंने कहा- यह अब तैयार है।फिर मैंने उसकी टांगों को उठा कर उसकी चूत पर ढेर सारा थूक डाला और अपना लंड उसकी चूत पर रखकर जोर से धक्का मारा तो उसके मुँह से जोर से आवाज निकली- मर ग़ाय़ीईईई ईई ईईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह श्र्श्रीईईईईईईई बस करो !

मैंने कहा- अभी तो बस आधा ही गया है।

उसने कहा- रहने दो, मेरी चूत फटी जा रही है और बहुत दर्द हो रहा है।

लेकिन मैंने उसकी टांगों को कस के पकड़कर फिर से एक जोर का धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया।

वो फिर से चिल्लाई- आआआआ ईईईईई ! आर्यन तुम तो बहुत बेदर्द हो।

मैंने कहा- जान, इसी दर्द के बाद ही तो स्वर्ग का मजा आएगा।

उसने अपना सर उठा कर नीचे देखा तो पूरी चादर खून से लथपथ थी, वो डरकर बोली- यह क्या है ?

मैंने कहा- यह तो मजा आने की निशानी है।

और फिर मैंने उसकी चूचियों को चूसना चालू कर दिया जिससे वो अपने दर्द को भूलकर मजा लेकर मस्ती के साथ आआह्ह आआआआआह्ह्ह्हह्ह करने लगी और बोली- मेरी इस चूत को चोदो ! यह तो चुदवाने के लिए फ़ैल चुकी है।

फिर मैंने जोर-जोर से धक्के मारना चालू कर दिया, उसे मजा आने लगा और मुझे भी मजा आने लगा। थोड़ी देर बाद वो मुझसे कस के चिपक गई और झड़ गई। फिर मैं भी दो चार धक्के मारने के बाद झड़ने लगा। मेरा गरम वीर्य उसकी चूत में प्रवेश करने लगा।

उसने कहा- बड़ा अच्छा लगा !

फिर मैंने उसी दिन बहुत सारे आसनों से उसे चोदा। फिर हमें जब भी मौका मिलता है तो हम चुदाई करते हैं।
You have read this article Hindi Sex Stories / Indian Sex Stories with the title Indian Sex Stories. You can bookmark this page URL http://jadejurgensen.blogspot.com/2011/06/blog-post_3128.html. Thanks!

तू मुझे उठा

तू मुझे उठा

प्रेषक : आदि

दोस्तो, मैं आदि, मेरी उम्र २० साल है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरा लण्ड छः इंच का है, मैं 6'1" लम्बा हूँ।

बात आज से लगभग एक साल पहले की है, मेरी मम्मी की तबीयत ख़राब होने के कारण हम लोगों ने एक आंटी को खाना पकाने के लिए रखा। वैसे वो काम वाली नहीं थी पर उनके घर की खराब हालत की वजह से वो हमारे घर काम करने आई।

वो बिलकुल गोरी चिट्टी थी, बड़े-बड़े मम्मे और मोटी गांड एक दम कातिल बदन था उनका। उनके घर में आते ही मुझे मस्ती चढ़ जाती थी। मैं उन दिनों छुट्टियों की वजह से घर पर ही रहता था और मेरे घर वाले सुबह ही काम पर चले जाते थे, मम्मी दो बजे से पहले नहीं आती थी।

तो अब बात पर आते हैं असली बात पर !

आंटी मुझे वासना की निगाह से देखती है, यह मुझे पता नहीं था। लेकिन वो दिन का खाना बनाने आधा घंटे पहले ही आ जाती थी। तो मुझे कुछ कुछ महसूस हुआ क्योंकि वो मुझे कुछ-कुछ काम बताती रहती थी और उसी बहाने मैं उसे छू लिया करता था। उसे छूते ही मेरे बदन में करंट सा दौड़ने लगता था। मन करता था उसे वहीं दबोच लूँ पर हिम्मत कभी नहीं होती थी।

धीरे धीरे हमारी दोस्ती बढ़ी और मैं उन्हें किसी न किसी बहाने से छू लिया करता था और वो भी कभी ऐतराज़ नहीं करती थी। आग दोनों तरफ बराबर लगी थी। मेरा लौड़ा तो उसे देखते ही खड़ा हो जाता था, वो भी उसे देखती रहती और नीचे झुक कर अपनी चूचियों के दर्शन कराती थी।

एक दिन अंजू ने मुझसे कहा- आदि, तू मुझे उठा सकता है क्या ?

मैंने कहा- आराम से।

वो बोली- नहीं उठा सकता !

मैंने कहा- तो आओ, उठा कर दिखता हूँ।

और वो घड़ी आ गई जिसका मुझे और अंजू दोनों को इंतज़ार था। मेरा लौड़ा तो पहले से ही खड़ा था। मैंने अंजू को उठाया, मेरा एक हाथ उसकी चूची के ऊपर था और उसके चेहरा बिल्कुल मेरे करीब था। मैंने हिम्मत करके अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए, उसने भी मेरा साथ दिया।

फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। मैं उसका कुरता उतारने लगा तो बोली- अपनी अंकल की जगह पर मत जा !

मैंने कहा- सब जगह अब मेरी है !

और मैंने जोर से उसके होंठ चूम लिये। वो गर्म हो गई थी। मैंने उसका कुरता उतार दिया और सलवार भी। अब वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी। मैं उसके ऊपर लेट गया और उसकी चूचियाँ मसलने लगा। वो आआ आआअहहहहह ऊ ऊऊ उहह्ह्ह्हह्ह की आवाजें निकालने लगी। उन सिसकारियों ने मुझे और ज्यादा उत्तेजित कर दिया और मैं उसकी चूचियाँ बहुत बुरी तरह चूसने लगा और चूसते-चूसते मैंने उसकी पैंटी उतार दी।

अब वो पूरी नंगी थी। फिर उसने पहले मेरी शर्ट उतारी और मुझे चूमने लगी। फिर उसने मेरी पैंट उतारकर मेरा लौड़ा चूसने लगी। क्या लंड चूसा उसने, वो मज़ा आ गया।

मैंने भी उसके मुँह में ही धक्के मारने शुरू कर दिये। करीब 15 मिनट बाद वो मेरा सारा माल पी गई।

फिर वो मेरे ऊपर चढ़ गई और मुझे पागलों की तरह चूमने लगी। मैंने उसके बाल पकड़ कर उसके होंठ दुबारा चूमे और मैं क्या देखता हूँ- मेरा लण्ड दुबारा खड़ा हो गया है।

मैंने उसकी टाँगें फैलाई और एक झटके में उसकी चूत में घुसेड़ दिया। वो तड़प उठी और मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया। मैं पूरे जोश में था और सच बताऊँ दोस्तो, मुझसे कण्ट्रोल भी नहीं हो रहा था। मैं बहुत तगड़े-तगड़े धक्के मारने लगा, वो बोली- धीरे धीरे मार ! फाड़नी है क्या मेरी चूत तुझे?

मैंने कहा- आंटी, आज मत रोको ! आज बस भोंसडा बना दूंगा तेरी चूत का।

जैसे-जैसे मैंने जोर से धक्के मारे, वो बोलती- आआ आ आ आअह्हह्ह आदि, धीरे ! मर जाउंगी ! आह आ.....आआ......हय मर गई मैं ! आ......अह।

थोड़ी देर में वो अपनी गांड उठा-उठा कर चुदने लगी। वो एक बार झड़ चुकी थी। मेरा माल निकलने वाला था, मैंने धक्के और तेज़ कर दिए। पूरे कमरे में कच कच और सिसकारियों की आवाजें गूंजने लगी।

वो बोली- आदि, आ आअह्ह्ह ह्ह्ह् ! और जोर से फाड़ दे आह आ अह आह आअह आह आह आह ऊह।

मेरा भी निकलने वाला था, हम दोनों पसीने पसीने हो गये थे और तभी आंटी फ़िर झड़ गई और उसके मुँह से संतुष्टि भरी आवाज़ निकली अअआआ.........आआह्ह्ह ह्ह्ह

तभी मैं भी झड़ गया।

थोड़ी देर तो हम ऐसे ही लेटे रहे और फिर हम अलग हो गए।

सच बताऊं दोस्तो, उस दिन को कभी नहीं भूल सकता क्योंकि वो मेरी पहली चुदाई थी।
You have read this article Hindi Sex Stories / Indian Sex Stories with the title Indian Sex Stories. You can bookmark this page URL http://jadejurgensen.blogspot.com/2011/06/blog-post_4967.html. Thanks!

मेरा प्रिय पति

This summary is not available. Please click here to view the post.
You have read this article Hindi Sex Stories / Indian Sex Stories with the title Indian Sex Stories. You can bookmark this page URL http://jadejurgensen.blogspot.com/2011/06/blog-post_955.html. Thanks!

जन्मदिन का तोहफ़ा

जन्मदिन का तोहफ़ा

प्रेषिका : प्रतीक्षा राय

मेरा नाम जय है, मैं पचमढ़ी का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 26 वर्ष है। मैं बहुत ही मिलनसार और सेक्सी हूँ। मेरा लंड काफी बड़ा और आप कह सकते हैं कि बस मस्त है। मेरे दोस्तों का कहना है- सिंधन की चूत, पंजाबन का दूध, हिमालय की ठण्ड और जय का लंड इनका कोई मुकाबला नहीं है।

मैं आज से 5 साल पहले भोपाल आ गया क्योंकि मुझे भोपाल में अच्छा लगता है। मैंने पंचशील नगर में कमरा किराये पर लिया। नीचे मकान मालिक और ऊपर मेरा कमरा, मेरे बाजू में एक और किरायेदार, जो ड्रायवर था, पति पत्नी रहते हैं। मेर कमरे में बाथरूम नहीं था तो मैं मकान मालिक का बाथरूम इस्तेमाल करता हूँ और मेरे कमरे की खिड़की से बाथरूम की झलक देखी जा सकती है जो मेरा टाइम पास हो गया है।

मालिक बैंक मैनेजर है, उसके दो लड़के हैं बड़ा बाहर ही रहता है, छोटा लड़का मेरी उम्र का, नाम राकेश है, नशा भी करता है। उसके बाद सबसे छोटी उसकी लड़की मीनू जो स्कूल में पढ़ती है, रंग गोरा, भरपूर बदन, गोल-गोल मोटी गांड, बड़े-बड़े बोबे और मेरी सबसे बड़ी कमजोरी !

मैं भोपाल आकर घर को बहुत याद करता था क्योंकि वहाँ खूब चुदाई करता था। यहाँ कोई जुगाड़ ही नहीं, बस मुठ ही मारते रहो।

जब भी मैं नहाने जाता, नंगा होकर खूब नहाता और मीनू की ब्रा और पेंटी से खूब खेलता। उसे पहनकर नहाता और कभी कभी उसे लंड में फँसाकर मुठ मारता। पैसे की मेरे पास कमी नहीं है, घर से खूब आते रहते हैं। मैंने मकान मालिक को बताया कि मैं पढ़ाई करता हूँ। कुछ दिन ऐसे ही गुजरते गए, कभी कभी मीनू को, कभी उसकी माँ को मैं बाथरूम में देखता, पूरा तो दिखता नहीं था पर जितना दिखता था मेरे मौसम बनाने के लिए काफी था।

मैं होम थियेटर लाया। मीनू को गाने सुनने का बहुत शौक था। जब भी उसके पसंद का गाना बजता, वो ऊपर मेरे कमरे के पास घूमती रहती और गाने सुनती या बाजू वाली भाभी के पास बैठती। पड़ोस में एक ही पड़ोसी के कारण मेरी उनसे अच्छी दोस्ती हो गई। मैं भाभी के कमरे में और कभी भाभी मेरे कमरे में घंटों बातें करते।

मैंने धीरे धीरे भाभी से भैया को न बताने की कसम देकर शादी के पहले उनके दोस्त से उनकी चुदाई की पूरी कहानी पूछ ली।

भाभी ने मुझसे पूछा तो मैंने कहा- अभी कोई मिली नहीं !

भाभी से मेरी खूब गन्दी गन्दी बातें होने लगी। मैंने सोचा क्यों न भाभी को ही चोद लिया जाये।

एक दिन मैंने बातें करते करते भाभी के बोबे दबा दिए। भाभी ने ज्यादा कुछ नहीं कहा तो मैं भैया के जाने के बाद खूब बोबे दबाता और भाभी को गर्म करता।

एक बार मैंने भाभी के बोबे खूब दबाये और उसकी साड़ी के अन्दर जबरदस्ती उसकी चूत में ऊँगली डाल दी। भाभी की चूत गीली हो गई। मैंने भी उंगली अन्दर-बाहर की और भाभी की चूत के चने को रगड़ दिया तो भाभी तो कोयल जैसे कूकने लगी। मैंने सोचा- बेटा जय ! आज तेरा उपवास खुल गया !

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और भाभी को पकड़ा दिया।

भाभी ने कहा- यह तो तुम्हारे भैया के लण्ड से भी ज्यादा पहलवान है।

रगड़ा पट्टी में भाभी झड़ गई और हिला हिला कर मेरा मुठ मार कर वीर्य निकाल दिया और बोली- यह तो रो रहा है।

मैंने 5 मिनट तक कुछ नहीं कहा और फिर से लंड खड़ा करके बोला- भाभी, लो यह लड़ने के लिए तैयार है ! अब जीत कर बताओ !

भाभी बोली- तुमसे क्या जीतना, मैं तो तुमसे हारना चाहती हूँ, मगर यह मैं नहीं कर सकती क्योंकि मेरे पेट में बच्चा है।

मैं उदास हो गया।

मुझे देखकर भाभी ने मेरा लंड पकड़कर मुँह में भर लिया और चूसने लगी। मैं तो पागल सा हो गया। कभी किसी ने मेरा लंड नहीं चूसा था। मेरे मुँह से सिसकारी निकलने लगी। मैंने लंड छुड़ाना चाहा पर भाभी कहाँ मानने वाली थी। पूरी आइसक्रीम चूस कर ही दम लिया। लेकिन लंड की भूख तो चूत से ही मिटती है, भाभी के गर्भवती होने के कारण सब लफड़ा हो गया।

मैं अपने कमरे में गया और सो गया।

दूसरे दिन भैया के जाते ही भाभी से गपशप चालू हो गई। मैंने कहा- भाभी, मीनू तुम्हारे घर आती है, उससे दोस्ती करा दो !

भाभी ने कहा- यह तो मेरे बाएँ हाथ का खेल है।

भाभी ने अगली दोपहर मीनू को घर पर बुलाया और मुझ से मिलाया। मीनू से मेरी दोस्ती की बात कही।

उसने सोच कर बताने को कहा और अगले दिन हाँ कर दी।उसकी हाँ सुनते ही मैं मीनू की चुदाई के सपने देखने लगा। कभी उसको स्कूल से घुमाने ले जाता, मैं उसे चूमता तो उसे बुरा लगता।

अब हम दोनों हमारे ही कमरे में मिलने लगे। मीनू का जन्मदिन आया, वो सुबह ही मेरे कमरे में आई और मुझे चूम लिया।

मैंने भी उसे बर्थ डे की बधाई दी और पूछा- तुम्हें क्या तोहफ़ा चाहिए ?

मीनू ने कहा- तुम जो भी प्यार से दोगे, मैं ले लूंगी।

मैंने फिर से पूछा, उसने फिर वही कहा।

मैंने कहा- अपनी बात से मुकरोगी तो नहीं?

उसने कहा- बिलकुल नहीं !

मैंने भी देर न करते हुए कहा- मैं अभी गिफ्ट देना चाहता हूँ।

मैंने मीनू हाथ पकड़कर खींचा और बिस्तर पर पटक लिया। वो सुबह सुबह नहा कर आई थी, बाल खुले थे, टॉप-स्कर्ट पहने हुए थी।

मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके बोबे पहली बार दबाये।

मीनू सिसककर बोली- यह क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- गिफ्ट दे रहा हूँ।

इस पर मीनू बोली- ऐसे भी गिफ्ट देते हैं?

मैंने कहा- अभी तुम ही ने कहा था कि मैं बुरा नहीं मानूंगी, जो भी देना चाहो, दे देना।

मैं तो सो कर उठा था, तो सिर्फ चड्डी में था। मेरा सामान तो सुबह सुबह ही टन्ना गया।

मैंने समय ना गंवाते हुए उसके बोबे दबाना जारी रखा और मुँह में जीभ डालकर किस करने लगा। मीनू दो ही मिनट में अंगड़ाई लेते हुए मेरा साथ देने लगी। बोबे दबाते हुए उसकी टॉप हटा दी, ब्रा के हुक भी खोल दिए और स्कर्ट खींच कर अलग कर दी। मीनू सिर्फ पेंटी में गजब लग रही थी।

उसके बोबे के गुलाबी-गुलाबी चुचूकों को मैंने अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। मीनू कराहने लगी। चूसते चूसते उसकी पेंटी में ऊँगली डाली, उसकी झांटों में उन्गली घुमाते हुए मैंने अचानक उसकी चूत में घुसा दी।

मीनू उन्ह आंह आइंह कर रही थी, उसकी चूत से चिकना चिकना पानी निकल रहा था।

मैंने चड्डी अलग की और मीनू की चूत में लंड रगड़ने लगा। रगड़ते रगड़ते उसके कन्धों को पकड़कर ज्योंही लंड मीनू की चूत में एक ही झटके में आधा घुसा, मीनू चिहुंक उठी और धक्का देने लगी। मैंने भी लंड चूत की रगड़ा पट्टी चालू रखी उसकी चूत को घिस डाला, पूरा लण्ड अन्दर बिठा दिया।

अब मीनू मुझे कस कर पकड़े थी और मैं उसे बस चोदे जा रहा था। वो आइया उम्नह आहा ओई कर-कर के चुदवा रही थी।

मैंने उसको उस दिन दो बार चोदा, बड़ा मज़ा आया पर एक बात अखरी कि मीनू की चूत से खून नहीं निकला। मेरे पूछने पर भी वो अंजान बनी रही। खैर मुझे क्या !

उस दिन के बाद में दो साल तक जब भी मौका मिलता, मीनू को खूब चोदता !

भाभी को चुदाई की मिठाई भी खिलाई।

पर अब मीनू की पिछले साल शादी हो गई है और अब मैं भाभी को चोदकर काम चला रहा हूँ।
You have read this article Hindi Sex Stories / Indian Sex Stories with the title Indian Sex Stories. You can bookmark this page URL http://jadejurgensen.blogspot.com/2011/06/blog-post_9933.html. Thanks!
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...